Putrada Ekadashi 2026: आज 24 अगस्त को है पुत्रदा एकादशी व्रत, जानें कथा और पारण का समय

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा और पारण समय

Putrada Ekadashi 2026: आज यानी 24 अगस्त 2026 को वैष्णव परंपरा के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। वृंदावन सहित कई वैष्णव क्षेत्रों में श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर व्रत रख रहे हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख, संतान की खुशहाली और परिवार की सुख-शांति की कामना के लिए रखा जाता है। इसी कारण संतान की इच्छा रखने वाले दंपती इस व्रत को विशेष श्रद्धा के साथ करते हैं।

व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। पूजा में पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है। दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण, मंत्र जाप और एकादशी व्रत कथा का श्रवण करने की परंपरा है।

25 अगस्त को होगा व्रत का पारण

जो श्रद्धालु वैष्णव परंपरा के अनुसार 24 अगस्त को पुत्रदा एकादशी का व्रत रख रहे हैं, वे अगले दिन यानी 25 अगस्त को द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करेंगे।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर जी के बताए अनुसार, 25 अगस्त को पारण का समय सुबह 5:58 बजे से 8:39 बजे तक रहेगा।

धार्मिक परंपरा में एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में करने का विधान माना जाता है। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा करने और इसके बाद अपनी श्रद्धा व सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करने की परंपरा है।

23 और 24 अगस्त को लेकर क्यों हुआ कन्फ्यूजन?

पुत्रदा एकादशी की तारीख को लेकर इस बार काफी असमंजस रहा। अलग-अलग पंचांग और परंपराओं के कारण 23 और 24 अगस्त दोनों तारीखें सामने आईं।

कुछ पंचांगों में गृहस्थ श्रद्धालुओं के लिए 23 अगस्त को एकादशी व्रत की तारीख बताई गई, जबकि वैष्णव परंपरा के अनुसार 24 अगस्त को व्रत रखा जा रहा है।

दरअसल, एकादशी व्रत की तारीख तय करने में सूर्योदय के समय तिथि, एकादशी तिथि की अवधि और गृहस्थ तथा वैष्णव परंपराओं के नियमों का महत्व होता है। इसी वजह से अलग-अलग स्थानों और परंपराओं में व्रत की तारीख अलग हो सकती है।

वैष्णव परंपरा में 24 अगस्त को व्रत

वृंदावन की वैष्णव परंपरा के अनुसार 24 अगस्त को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर जी ने भी इसी तारीख को व्रत रखने की बात कही है।

ऐसे में जो श्रद्धालु वैष्णव परंपरा का पालन करते हैं, वे 24 अगस्त को व्रत रखकर 25 अगस्त को निर्धारित पारण समय में व्रत खोल सकते हैं।

पुत्रदा एकादशी की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में महिष्मती नगरी पर सुकेतुमान नाम के राजा का शासन था। राजा बहुत धार्मिक और प्रजा का पालन करने वाले थे, लेकिन उन्हें संतान नहीं थी। संतान न होने के कारण राजा और उनकी पत्नी हमेशा चिंतित रहते थे।

एक दिन राजा सुकेतुमान दुखी होकर घोड़े पर सवार होकर जंगल की ओर चले गए। काफी दूर जाने के बाद उन्हें एक सुंदर सरोवर दिखाई दिया। सरोवर के किनारे उन्होंने कई ऋषियों को देखा। राजा ने वहां पहुंचकर ऋषियों को प्रणाम किया और अपनी परेशानी बताई।

ऋषियों ने राजा को बताया कि वे सभी विश्वदेव हैं और उन्हें राजा की समस्या का कारण पता है। उन्होंने कहा कि आज पुत्रदा एकादशी है। यदि राजा इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु का व्रत और पूजन करें तथा द्वादशी के दिन विधि-विधान से पारण करें, तो भगवान विष्णु की कृपा से उनकी संतान की इच्छा पूरी हो सकती है।

राजा ने ऋषियों की बात मान ली। उन्होंने पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा और पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा की। अगले दिन द्वादशी तिथि में विधि-विधान से व्रत का पारण किया।

राजा की भक्ति से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए। कुछ समय बाद राजा की पत्नी गर्भवती हुईं और उन्होंने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। पुत्र के जन्म से राजा और रानी का जीवन खुशियों से भर गया। उनका पुत्र बड़ा होकर योग्य और प्रजा का प्रिय राजा बना।

तभी से पुत्रदा एकादशी को संतान प्राप्ति और संतान की सुख-समृद्धि की कामना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो दंपती श्रद्धा और नियमपूर्वक पुत्रदा एकादशी का व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उन्हें संतान सुख और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है।