Nirjala Ekadashi Vrat Paran Muhurat: आज निर्जला एकादशी व्रत है। इस व्रत को करने से पूरे वर्ष में होने वाले सभी एकादशी का फल प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की आराधना करते हुए अन्न और जल का त्याग कर उपवास रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का पारण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना कि व्रत रखना। इसलिए द्वादशी तिथि के भीतर और शुभ मुहूर्त में व्रत खोलने की परंपरा है। आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी व्रत का पारण कब और किस समय करना शुभ रहेगा।
26 जून 2026 को निर्जला एकादशी व्रत का पारण कब करें?
वैदिक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून 2026, शुक्रवार को सुबह 05 बजकर 49 मिनट से सुबह 09 बजकर 03 मिनट तक करना शुभ रहेगा। श्रद्धालुओं को इसी समयावधि में भगवान विष्णु की पूजा के बाद व्रत का पारण करना चाहिए।
पंचांग के अनुसार, द्वादशी तिथि 25 जून 2026 को शाम 04 बजकर 39 मिनट पर प्रारंभ होगी और 26 जून 2026 को शाम 06 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी। धार्मिक नियमों के अनुसार व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले ही करना चाहिए।
द्वादशी के भीतर पारण करना क्यों जरूरी माना जाता है?
एकादशी व्रत का पूरा फल तभी प्राप्त होता है जब उसका पारण निर्धारित समय और द्वादशी तिथि के भीतर किया जाए। यदि कोई श्रद्धालु द्वादशी समाप्त होने के बाद व्रत खोलता है, तो इसे शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है। इसलिए समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।
निर्जला एकादशी का पारण सात्विक भोजन से करना शुभ माना जाता है। पारण की शुरुआत पहले जल ग्रहण करके और भगवान विष्णु को अर्पित तुलसी दल के साथ किया जाना चाहिए। इसके बाद फल और प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।
निर्जला एकादशी व्रत का क्या महत्व है?
मान्यता है कि जो लोग वर्षभर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते, उनके लिए निर्जला एकादशी का व्रत विशेष फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी के बाद योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। वर्ष 2026 में योगिनी एकादशी 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को पड़ेगी।








