धनतेरस पर कुबेर और लक्ष्मी की पूजा से खुलेंगे भाग्य के द्वार, जानें शुभ विधि और मंत्र जाप का महत्व

धनतेरस

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाने वाला धनतेरस दीपावली की शुभ शुरुआत माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और धन के स्वामी कुबेर देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा और विधि से पूजा करता है, उसके घर में स्थायी सुख-समृद्धि और वैभव का वास होता है।

धनतेरस की संध्या के समय सूर्यास्त के बाद पूजा आरंभ करें। घर को शुद्ध करने के लिए गंगाजल का छिड़काव करें और मुख्य द्वार पर तेरह दीपक जलाएं। इसके बाद कुबेर देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और चंदन, फूल, धूप तथा फल अर्पित करें। विष्णु पुराण में वर्णित कुबेर मंत्र “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।” का 21 बार जाप करें। माना जाता है कि यह मंत्र आर्थिक समृद्धि लाता है और जीवन से दरिद्रता को समाप्त करता है।

इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें। कमल गट्टे की माला से “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।” मंत्र का 108 बार जाप करें। पूजा में घी का दीपक, लाल फूल और मिष्ठान्न चढ़ाएं। पूर्व दिशा की ओर मुख करके जाप करने से शुभ फल प्राप्त होता है। लक्ष्मी तंत्र में कहा गया है कि इस दिन किया गया जाप धन के साथ-साथ घर में सौभाग्य और शांति भी लाता है।

धर्मग्रंथों के अनुसार, धनतेरस की शाम कुबेर और लक्ष्मी दोनों मंत्रों का संयुक्त जाप करने से पूरे वर्ष घर में धन, धान्य और सुख की वृद्धि होती है। पद्म पुराण में यह भी उल्लेख है कि इससे ग्रह दोष शांत होते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जो व्यक्ति यह पूजा श्रद्धा से करता है, उसके जीवन में आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।