नई दिल्ली। आज नवरात्रि का चौथा दिन है, जिसमें माता कुष्माण्डा की पूजा करने का विधान है। नवरात्रि में फल प्राप्ति के लिए भक्त नौ दिनों का व्रत उपवास भी करते हैं, जिससे माता रानी उनके प्रसन्न हो जाएं और उनको मनवांछित फल दें। मां कूष्मांडा ने ब्रह्मांड की रचना की है। इसके लिए मां कूष्मांडा को जगत जननी आदिशक्ति भी कहा जाता है। कहा जाता है कि माता कुष्माण्डा का निवास स्थान सूर्य लोक में है। माता के आशीर्वाद से लोगों का कल्याण होता है। संपूर्ण जगत प्रकाशमय हो जाता है।
आप तो जानते ही होंगे कि माता कुष्माण्डा की सवारी सिंह है। माता रानी अष्टभुजाधारी है। धार्मिक मान्यता ये भी है कि माता रानी की पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र नवरात्र के चौथे दिन दुर्लभ भद्रावास का योग बन रहा है। आइये इल लेख में जानेंगे कि कब बनेंगे शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि 2024 में चतुर्थी तिथि दोपहर के 1 बजकर 11 मिनट से तक है। वहीं इसके तुरंत बाद ही पंंचमी शुरू हो जाएगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक है। इस दैरान माता रानी की पूजा की जा सकती है। वहीं इस दिन कृतिका नक्षत्र भी बन रहा है। खास बात तो ये है कि जिस भी ये नक्षत्र पडता है, उस दिन कार्तिगाई मनाई जाती है।
भद्रावास योग
ज्योतिषियों का कहना है कि नवरात्रि में इस बार चौथे दिन भद्रावास के योग बन रहे हैं। ये आज दोपहर 1 बजकर 11 मिनट तक रहने वाला है। कहा जाता है कि इस मुहूर्त में माता कुष्माण्डा की पूजा करने से संंसार के सभी सुखों की प्राप्ति होता है। शास्त्रों में लिखा हुआ है कि भद्रा के सभी लोग में रहने वाले जीव और मानव जगत का कल्याण होगा।








