नवरात्रि के नौ दिनों में हर दिन मां दुर्गा के एक अलग रूप की पूजा की जाती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। माना जाता है कि इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन में अद्भुत फल मिलते हैं। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, संयम और आत्मबल की देवी हैं। उनका आशीर्वाद पाने से इंसान कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखता है और जीवन की हर चुनौती को पार कर जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी कौन हैं?
कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तप किया। इसी रूप में वे मां ब्रह्मचारिणी कहलाती हैं। उनके हाथ में जप की माला और कमंडल रहता है, जो तपस्या और संयम का प्रतीक है। उनकी पूजा करने से साधक के भीतर आत्मसंयम और भक्ति की शक्ति बढ़ती है।
पूजा का महत्व और लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं।
- साधक को मानसिक शांति और आत्मबल मिलता है।
- जीवन की कठिनाइयों को सहने की क्षमता बढ़ती है।
- व्यक्ति का मन ध्यान और साधना की ओर जाता है।
- सभी बाधाएं दूर होती हैं और सफलता का मार्ग खुलता है।
- मोक्ष की प्राप्ति का रास्ता आसान होता है।
पूजा विधि और रंग
दूसरे दिन की पूजा में सफेद रंग का खास महत्व है। भक्त इस दिन सफेद वस्त्र पहनते हैं और देवी को सफेद फूल अर्पित करते हैं। पूजा के समय देवी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर, फूल, धूप और मिश्री का भोग लगाया जाता है। मंत्र “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः” का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।








