10 तहखानों में से क्यों विशेष है ज्ञानवापी का व्यास तहखाना ? किन देवी-देवताओं की होती पूजा?

10 तहखानों में से क्यों विशेष है ज्ञानवापी का व्यास तहखाना ? किन देवी-देवताओं की होती पूजा?

उत्तरप्रदेश की काशी स्वयं महादेव की नगरी मानी जाती है. जहां महादेव के बारह ज्योतिर्लिंगों मे से एक ज्योतिर्लिंग भी विद्यमान हैं. मान्यता है कि काशी नगरी की स्थापना स्वयं शिवजी ने की थी. जहां आज काशी विश्वनाथ का विश्व विख्यात मंदिर मौजूद है. इस मंदिर के ठीक साथ में एक शिव मंदिर भी मौजूद था. जिसे मुगल शासक ऑरंगज़ेब ने ध्वस्त कराकर वहां ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था. लेकिन हिंदू पक्षों का सदियों से कहना था कि यहां भोलेनाथ का विश्वेश्वर मंदिर विद्यमान है. जिसके साक्ष्य भी ऐएसआई को मिले. इसको लेकर लंबे अर्सय से ज्ञानवापी मस्जिद विवाद छिड़ा हुआ था. लेकिन ASI सर्वेक्षण में हिंदू पक्ष के दावे सच साबित होने के बाद यहां ज्ञानवापी परिसर के अंदर स्थित व्यास जी का तहखाने में विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना शुरु कर दी गई. तो ऐसे में आइए जानते हैं क्या व्यास जी का तहखाना और यहां किस किस देवी-देवताओं की पूजा की जाती है.

काशी के ज्ञानवापी का इतिहास काफी पौराणिक काल का माना जाता है. इसी ज्ञानवापी का ज़िक्र हिंदू धर्म ग्रंथों में ज्ञान के कुंड या सरोवर के रूप में किया गया है. साथ ही, शास्त्रों में इसके अर्थ की विस्तार पूर्वक भी व्याख्या की गई है. ज्ञानवापी परिसर के अंदर एक तहखाना मौजूद है जिसे व्यास जी का तहखाना के नाम से जाना जाता है. हालही में कोर्ट के आदेश के बाद इस तहखाने में पूजा-अर्चना पुनः प्रारंभ कर दी गई है.

10 तहखानों में से क्यों विशेष है ज्ञानवापी का व्यास तहखाना ? किन देवी-देवताओं की होती पूजा?

बता दें कि ज्ञानवापी में कुल 10 तहखाने हैं.  जिसमें से एक व्यास जी का तहखाना है. जो 07 फीट ऊंचाई के साथ लगभग 900 स्क्वायर फीट में फैला है और काशी विश्वनाथ परिसर के गर्भगृह के समीप स्थित है. यह तहखाना ज्ञानवापी परिसर के दक्षिण भाग में है. इस तहखाने के ठीक सामने नंदी जी की मूर्ति स्थापित है.

अगर बात करें व्यास जी के तहखाने में पूजे जाने वाले देवी-देवताओं की, तो तहखाने के अंदर भगवान शिव, कुबेर, श्री गणेश, हनुमान जी सहित मां गंगा की अति प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं. इस तहखाने में पांच प्रहर की पूजा होती है. जिसके साथ राग-भोग भी सम्मिलित है.

यहां प्रातः 3 बजकर 30 मिनट पर मंगला आरती की जाती है. 12 बजे दोपहर में भगवान का भोग लगाया जाता है..वहीं, श्रृंगार भोग शाम 4 बजे और संध्या आरती शाम 7 बजे की जाती है. जिसके बाद दिन की आखिरी यानी शयन आरती रात्रि 10 बजकर 30 मिनट पर की जाती है.