हिंदू धर्म में मां दुर्गा की उपासना बहुत ही विधि विधान से की जाती है। हम मुख्य रूप से साल में दो बार नवरात्रि का त्योहार मनाते हैं और इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना करते हैं। माता रानी का पहला स्वरूप है शैलपुत्री। आइये इस लेख में हम मां शैलपुत्री के बारे में जानेंगे।
दाएं हाथ में त्रिशूल, तो बाएं हाथ में कमल
मां दुर्गा के सबसे पहले शैलपुत्री के स्वरूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि मां शैलपुत्री का जन्म हिमालय में हुआ था और यही कारण है कि उनका नामकरण शैलपुत्री किया गया। कहा जाता है कि मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है। यही कारण है कि माता शैलपुत्री को वृषारूढ़ा के मान से भी जाना जाता है। माता रानी के स्वरूप की बात करें, तो इन्होंने अपने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण किया है। वहीं बाएं हाथ में कमल पकड़ा हुआ है। शैलपुत्री पहली दुर्गा हैं। वहीं इन्हें सती का नाम भी दिया गया है, जिसकी मार्मिक कहानी भी है।
दक्ष के यज्ञ में आमंत्रित नहीं थे भगवान शिव और सती
मान्यताओं के अनुसार, एक बार दक्ष ने यज्ञ किया, जिसमें उन्होंने सभी देवताओं को आमंंत्रित किया, लेकिन उन्होंने भगवान शिव और माता सती को नहीं बुलाया था। सती ने यज्ञ में जाने की इच्छा जताई, तो भगवान शिव ने कहा कि हमें नहीं बुलाया गया है। ऐसे में वहां जाना उचित नहीं होगा। सती का मन नहीं माना।
पति का हुआ अपमान को क्रोधित हुई सती
सती के मन के आगे भगवान शिव ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। सती जब अपने घर पहुंची, तो उन्होंने देखा कि उनके आने से सिर्फ उनकी मां ही थी, जो प्रसन्न थी। एक तरफ बहनों ने ताने मारे। उनके पिता दक्ष ने भी उनके पति भगवान शिव के प्रति अपमानजनक बातें कहीं। उन्होंने देखा कि उनके घर में भगवान शिव को लेकर तिरस्कार के भाव थे, जिसको देखते हुए वह क्रोधित हो गईं, उनसे ये सब बर्दाश्त नहीं हो पाया।
खुद को यज्ञ की अग्नि में किया भस्म
सती अपने पति का अपमान सहन नहीं कर सकी और योगाग्नि में स्वयं को जलाकर भस्म कर लिया। यह देख भगवान शिव में उस यज्ञ का ही विध्वंस करा दिया। बता दें कि यही सती थी, जो कि अगले जन्म में हिमालय के शैलराज की पुत्री बनकर जन्मीं और शैलपुत्री के नाम से जानी गईं।
माता शैलपुत्री के कई नाम हैं, जैसे पार्वती और हेमवती। बता दें कि शैलपुत्री का विवाह भी भगवान शंकर से हुआ। शैलपुत्री शिवजी की अर्धांगिनी बनीं। इनका महत्व और शक्ति अनंत है।








