Navratri 2nd Day: इस साल शारदीय नवरात्रि का शुभआरंभ 15 अक्टूबर से होने जा रहा है. हिंदु धर्म में इस पर्व का काफी अधिक महत्व है. नवरात्रि माता दुर्गा के नौ अलग-अलग रुपों को समर्पित होता है. नौ दिनों में हर दिन माता के अलग स्वरूप की उपासना की जाती है. ऐसे में नवरात्रि के दूसरे दिन के अवसर पर माता ब्रह्मचारिणी को पूजा जाता है. ब्रह्मचारिणी शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है. ब्रह्म अर्थात तपस्या. चारिणी अर्थात आचरण करने वाली. मातारानी को सशक्त नारी शक्ति का प्रतीक माना गया है.
ये माता पार्वति का तपस्विनी रूप है. दाय हाथ में रूद्राक्ष की माला, बाय हाथ में कमंडल माता के तपस्विनी रूप को दर्शाता है. माता ब्रह्माचारिणी एक मुनि देवी मानी जाती है. जो सदियों तक अपनी तपस्या में लीन रही थीं. माता के कठोर तप के पीछे एक पौराणिक कथा है..आइए जानते है..
ये तो आप जानते ही है माता पार्वती हिमालय राज की पुत्री के रूप में जन्मी थी. जिसकी वजह से उनका नाम शैलपुत्री रखा गया. माता ने अपने इस जन्म में भोलेनाथ को अपना आराध्य बनाने के लिए बहुत कठोर तप किया था. अपनी इस तपस्या के दौरान माता करीब हज़ारों वर्षों तक फल पर जीवित रही थीं. इसके अलावा माता ने कड़ी धूप और भारी बारिश जैसे भयानक कष्ट भी सहे थें.
कई सदियों तक लगातार इस तपस्या को करने के कारण माता का शरीर एकदम दुर्बल हो गया था. जिसके चलते माँ की स्थिति को लेकर तीनों लोकों में हाहाकार मच गया. देवगणों से लेकर ऋषिगणों ने माता की सराहना करते हुए ये कहा कि उनके जैसा कठोर तप किसी ने नहीं किया. न ही कभी कर पाएगा. अंत में पितामह ब्रह्मा जी ने आकाशवाणी के ज़रिए माता ब्रह्मचारिणी को तपस्या से उठने को कहा और उनके कठोर तप को देख उन्हें ये वरदान दिया कि उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी. तत्पश्चात माता का विवाह उनकी इच्छानुसार देवो के देव महादेव के साथ हो गया.
यही कारण है की माता ब्रह्णचारिणी को तपस्या, ज्ञान और वैराग्य की देवी के रूप में पूजा जाता है और आज के दिन जो भी भक्त माता की पूरे विधि-विधान के साथ उनकी उपासना करता है, उससे प्रसन्न होकर माता अवश्य फल देती हैं.
इस तरह करें माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा
नवरात्रि के दूसरे दिन शास्त्रीय विधि से माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। माँ को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद अक्षत, चंदन और रोली चढ़ाएं।
माँ ब्रह्माचारिणी को कमल और गुड़हल के फूल पढ़ाएं। पूजा में इन फूलों को शामिल जरूर करें। इसके बाद कलश देवता और नवग्रह मंत्र की विधिवत पूजा करें। देवी माँ की आरती करें और आरती घी तथा कपूर के दीपक से करें। साथ ही माँ ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप भी करें।
इन चीजों का लगाएं भोग
माँ ब्रह्मचारिणी को पीली मिठाई का भोग लगाएं। इसके अलावा केले का भोग भी लगा सकते हैं। इससे माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर कृपा बरसाती हैं।